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कविताएं (Poems)


  1. जब प्यार हुआ तो पार हुआ जीवन के झाल झमेले से (jab pyar hua to paar hua)
  2. तेरी आखें कुछ तो कहती है (Teri aakhen kuch to kahti hai)
  3. जब तुम्हारे साथ मैंने ये सफ़र प्रारम्भ किया (Jab Tumhare saath maine ye safer prarambh kiye)
  4. दीवारों के कान भले न हो पर दिल जरूर होते है
  5. मैं अंधेरे कमरे का कोना (andhere kamre ka kona)
  6. Astitva-Mera-Mujhi-Main
  7. दोस्ती
  8. एक ऐसी ग़ज़ल जो दिल को छु जाये भी (Ek Aise Gazal)


जब भी मेरे आंगन में हवा बहती है
चुपके से आकर मेरे कानों में कुछ कहती है
क्यों होता है पतझड़ में पत्तों का एक सवाल
हिस्से में उनकी क्यों बस जुदाई ही रहती है
























वक्त की धूल से ढकी तुम्हारी यादे
जब कभी तन्हाइयों की आंधी से
हल्की हल्की धुंधली होकर
कुछ बोलने की कोशिश करती हैं
तब मेरी खामोशी को वह अपनी
जुवां बना लेती है

मेरी पलकों पर छाई ओस की बूंदें
फिर उन धुंधली धुंधली यादों पर
टपककर कर थोड़ी बहुत रह गई
धुल को बिल्कुल साफ कर देती है

प्रेम से डूबी तुम्हारी आंखें
जिन्हे देखने की बेतावी मुझे हर रोज
तूफानों मे खिंच लाती है,एक हल्की
सी मुस्कान से मुझे निहारती सी नजर
आती है और फिर से तूफानों में
न आने का वादा करने को कहती है

पर
पर
पर मेरा फिर से वादा करने से मुकर जाना
उस वादे के लिए जब तुमने कहा था
"मुझे भुलाना नहीं"

----------------- अस्तित्व -----------------------

बहुत दिन से गुफ्तगू चालू थी की रूबरू हो गया
आकर मेरे सामने तनकर खड़ा हो गया
मै बड़ी सोच मे था की कहा से इतनी हिम्मत इसने जुटाई है
क्या इसके पुरे ही नाश होने की नौबत आयी है

आज उसकी हुंकार मे गर्जना थी
और गर्जना मे न कोई संका थी
गरजा वो मुझ पर उसके सवालों के साथ
कहने लगा उसके अस्तित्व की बात

मेरे अस्तित्व को तूने ही दबाया है
तेरे होने से ही मेरा अब कोई नहीं साया है
मै पहचानहीन हो गया हु
तेरे बाहर की दुनिया मे कही खो गया हु
तेरा झूठ मुझे मार रहा है
और जगत मुझे ही दोषी जान रहा है

मैंने बोला
तेरे अधूरे सत्य ने ही मुझे बनाया है
और तेरे पुरे असतय ने मुझे प्रेरणा दी है
मेरे जुठ से तुझे लानत आती है
पर जब तेरे अंदर के कीचड को अपने झूट से छुपाया था
तेरे अधूरे सच को जब दुनिया से बचाया था
तब तूने ही मुझे धन्यबाद किया था
मेरे होने पर सायद गर्व भी किया था

मै तो हु ही असत्य ये मुझे पता है
पर तू सत्य है या असतय क्या तुझे ये पता है
तेरा अस्तित्व बहुत कठिन है
हजारो पुस्तके, कहानिया और सबक लगते है तुझे बनने मे
और मुझे तो बस एक झूट ही काफी है

तेरे सत्य मे कोई जान नहीं है
तू सत्य है या असत्य इसका तुझे खुद ज्ञान नहीं है
तू खुद मुझे कितनी बार सत्य मान चूका है
मेरे होने से ही तेरा अधूरा सत्य जिन्दा है
क्युकी जग के लिए में ही तू है
और मेरे असत्य ही तेरा सत्य है
इसलिए तेरा अस्तित्व वैसा ही है
जैसा तूने मेरा अस्तित्व बनाया है

मैंने तेरा अस्तित्व नहीं छुपाया
तूने मुझे असतय के लिए ही है बनाया
अबकी तेरी कृति तुझ पे ही भरी होती है
तो तुझे तेरे अस्तित्व की हानि होती है

एक ही छवि है तू और मैं
पर शायद तू दो समझने की भूल कर बैठा
मैं वही हु जो सच मे तू है
जो सच मे तू है






















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