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Friday, April 5, 2019

जानवर जो ३०० डिग्री में भी जीवित रह सकता है - Tardigradum




दुनिया में ऐसे हज़ारों जीव है जिनके गुड ओर प्रक्रति इतने अजीब होते है की बिना वज्ञानिक तथ्य के विश्वास करना मुश्किल होता है । आज हम ऐसे ही एक जीव की चर्चा करेंगे जो आकर में तो इतना छोटा है की नग्न आँखों से दिखाई भी नहीं देता । पर ये जानवर ३०० डिग्री के तापमान , स्पेस vacuum ओर बहुत ही उच्च pressure पे ज़िंदा रह सकता है 

ऐसा ही एक जानवर है टार्डिग्रेड्स. बहुत ही अजीब सा दिखने वाला छोटा सा प्राणी पर बहुत ही दमदार 



जोहान अगस्त एफ़्रैम गोएज़ ने मूल रूप से जर्मन में टार्डीग्रेड क्लेनर वासेरबीर नाम दिया , जिसका अर्थ है "थोड़ा पानी भालू" (आज, उन्हें अक्सर जर्मन में बर्टियरचेन या "छोटे भालू जानवर" के रूप में संदर्भित किया जाता है)। Tardigradum नाम का अर्थ "धीमी गति से चलने वाला" है और इसे 1776 में लाज़ेरो स्पल्नज़ानी द्वारा दिया गया था




टार्डिग्रेड्स के बारे में क्या खास है?

टार्डिग्रेड आठ अंगों वाले सूक्ष्म जानवरों का एक वर्ग है और एक अजीब जानवर है जिसका एलियन जैसा व्यवहार है | पृथ्वी पर हर जगह उच्चतम पर्वत से लेकर सबसे निचले समुद्र तक, टार्डिग्रेड्स की कई प्रजातियां पायी जाती है | ये विशेषकर पानी में रहते हैं, लेकिन भूमि पर, आप उन्हें लगभग हर जगह और विशेस्कर काई में पाए जाते हैं।
शोधकर्ताओं की एक यूरोपीय टीम ने एक FOTON-M3 रॉकेट के बाहर दस दिनों के लिए पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए जीवित टार्डिग्रेड्स का एक समूह भेज था | और वैज्ञानिको ने पाया की टार्डिग्रेड्स पृथ्वी पर जीवित लौट आए | वैज्ञानिकों ने पाया कि टार्डिग्रेड  अंतरिक्ष में 68 प्रतिशत अनाज के माध्यम से रह रहे थे। मतलब ये की विषम परिस्थिति पे टार्डिग्रेड अपनी खुराक काम या जयादा कर सकता है|  है न बहुत अजीब | 

भूमि पर रहने वाले टार्डिग्रेड पृथ्वी के कुछ सबसे शुष्क स्थानों में पाए जा सकते हैं | जैसे की जहाँ पिछले 25 सालों से बारिश का कोई  रिकॉर्ड नहीं है



टार्डिग्रेड्स ऐसा कैसा कर पाता है ?

भूमि पर रहने वाले टार्डिग्रेड ने काम पानी या बिना पानी के रहने के लिए एक विचित्र समाधान विकसित किया है: जब उनका पर्यावरण सूख जाता है तब टार्डिग्रेड्स एक विशेष अवस्था में प्रवेश करते है जिसे डिसेकेशन कहा जाता है, जिसमें वे सिकुड़ते हैं - अपने शरीर के पानी के लगभग 3 प्रतिशत को खो देते हैं 
और अपने digestion को धीमा कर देते हैं, जो इसकी सामान्य गति का 0.01 प्रतिशत है। मतलब ये की जो खाना एक दिन में पचना था अब वह कम से कम १०० दिन में पचेगा | इस अवस्था में, टार्डिग्रेड तब तक बने रहते है, जब तक उन्हें फिर से पानी नहीं मिल जाता, तब तक वह कुछ भी नहीं करता है। जब ऐसा होता है, तो जीव फिर से स्वाभाविक जीवन में वापस आ जाता है जैसे कि कुछ भी नहीं हुआ था।
इससे भी अधिक आश्चर्यजनक बात यह है कि टार्डिग्रेड इस अजीब अवस्था में एक दशक से अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि टार्डिग्रेड्स की कुछ प्रजातियां एक सदी तक भी इस अवस्था में जीवित रह सकती हैं। जबकि टार्डिग्रेड का औसत जीवनकाल कुछ महीनों की ही होता है।"यह काफी अजीब लगता है, टार्डिग्रेड केवल कुछ हफ्तों या महीनों के लिए रहते हैं, कि जीवनकाल कई, कई वर्षों तक खिंच सकता है

नीचे दिते गए चित्रों में हम डेक सकते है कैसे अभी साधरण अवस्था से डिसेकेशन अवस्था में जाता है और वापस साधारण अवस्था में आ जाट है 



कुछ बहुत ही विशेष बातें 

  1. यह जीव 300 डिग्री फ़ारेनहाइट तक और निम्न -458 डिग्री फ़ारेनहाइट पेभी जीवित रह सकता है 
  2. डरती पर पाए जाने वाले सबसे भारी pressure (जो समुद्र तल में पाया जाता हैका  गुना झेल सकता है
  3. स्पेस में भी जीवित रह सकता है (धरती पर रहने वाले किसी अन्य जीव केलिये ये सम्भव नहीं है)
  4. Emergency के हालात पे अपने शरीर को सिकोड़कर छोटा कर लेता है जिससे ये बहुत कम भोजन पे दशकों तक जीवित रह पाता है 

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Wednesday, April 3, 2019

जब प्यार हुआ तो पार हुआ जीवन के झाल झमेले से (jab pyar hua to paar hua)




जब  प्यार  हुआ  तो  पार  हुआ  जीवन  के  झाल  झमेले  से 
मंदिर , मज़्जिद , गिरजे , द्वारे  और  जात  पात  के  रेले  से 
खाना -पीना  आना -जाना  छूट  गया , शुध  भूल  गया 
मदमस्त  बना  हु  दूर  खड़ा  अब , अपनी  अपनी  दे  ले  से 

दिन  हो  भारी  रात  घनी , परछाई  उसकी  साथ  चले 
अंधियारे  घर  में  दीपक  को  जिन्दा  रखने  को , जैसे  बाती  जले 
क्या  आखिर  सच्चाई  है , फिर  पुछा  आज  अकेले  से 
जब  प्यार  हुआ  तो  पार  हुआ  जीवन  के  झाल  झमेले  से 

वो  कहता  मेरी  राहें  ऐसी , जिसपर  चलना  दूभर  है 
मिलने  की  कोई  आश  नहीं , खोने  का  चलन  ही  जिसपर  है 
मै  कहता  हु  वो  प्यार  ही  क्या , जो  डरता  पाने  खोने  से 
जब  प्यार  हुआ  तो  पार  हुआ  जीवन  के  झाल  झमेले  से 

मैं  सोचा  करता  बैठा  बैठा , कैसी  इसकी  माया  है 
परे  हटाकर  भेदभाव  , सबको  इसने  अपनाया  है 
मन  शीतल , पावन , शांत  हुआ , सबकुछ  इसको  देने  से 
जब  प्यार  हुआ  तो  पार  हुआ  जीवन  के  झाल  झमेले  से 

ओरो  की  खुशियों  को  जो  मुस्कान  बना  लेता  अपनी 
और  गमो  में  विचलित  होकर , नाम  आखें  कर  लेता  अपनी 
मतलब  केवल  इसका  प्रेम  से  है , और  प्रेम  के  लेने  देने  से 
जब  प्यार  हुआ  तो  पार  हुआ  जीवन  के  झाल  झमेले  से 

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तेरी आखें कुछ तो कहती है (Teri aakhen kuch to kahti hai)

जब तुम्हारे साथ मैंने ये सफ़र प्रारम्भ किया (Jab Tumhare saath maine ye safer prarambh kiye)

दीवारों के कान भले न हो पर दिल जरूर होते है

मैं अंधेरे कमरे का कोना (andhere kamre ka kona)


Astitva-Mera-Mujhi-Main

Tuesday, April 2, 2019

तेरी आखें कुछ तो कहती है (Teri aakhen kuch to kahti hai)



कभी चलते चलते थम जाए , कभी  कुछ  सोचे  कभी  सकुचाये
कभी  अठखेली  ले  कभी  शरमाये  फिर  शर्माकर  जब  वो  झुक  जाएँ
पढ़  ले  पल  में  सबके  नैनो  को  खामोश  भी  जब  वो  रहती  हैं 
कुछ  खाव्व  बसाकर  पलकों में  तेरी  आँखें  कुछ  तो  कहती  हैं 

कभी  मुस्कान  सी  बनकर  खिल  जाएँ , कभी  अश्रु  बने  और गिर जाए  
कभी  इंकार  है  टूटे  दिल  का  ये , कभी  इजहार  पलों  में  कर  जाएँ 
गहराई  सागर  की  इनमे  और  स्थिर धरा  सी रहती  है 
कुछ  खाव्व  बसाकर  पलकों में  तेरी  आँखें  कुछ  तो  कहती  हैं 

कभी  चाँद  के  जैसे  मुस्काएं , कभी  सूरज  जैसे  गुसाएं 
कभी  तारो  सी  झिलमिल  होकर  ये  चैन  सुकून  जो  बरसायें 
जीवन  की  तपती  कड़ी  धुप  में  ये  छाया  बनकर  रहती  हैं 
कुछ  खाव्व  बसाकर  पलकों में  तेरी  आँखें  कुछ  तो  कहती  हैं 

कभी  बड़े  बड़े  भौचक्के सी , कभी  उलझन  से  हक्के बक्के  सी  
कभी  लाँन्ग  उम्र  की  सीमाएं लड़  जाएँ  जग  से  बच्चों  सी 
अंगड़ाई  बचपन  की  लेकर  मस्ती  में  डूबी  रहती  हैं  
कुछ  खाव्व  बसाकर  पलकों में  तेरी  आँखें  कुछ  तो  कहती  हैं 

कभी  कृष्णा  की  लीला  है  इनमे , कभी  मीरा  जैसी  प्रेम  लगन 
कभी  गोकुल  का  इनमे  रास  रंग , कभी  राधा  जैसी  निस्वार्थ  जलन 
प्रेम  ही  प्यास , प्रेम  ही  तृप्ति , बस  प्रेम  ही  प्रेम  ये  कहती  हैं 
कुछ  खाव्व  बसाकर  पलकों में  तेरी  आँखें  कुछ  तो  कहती  हैं 

Monday, April 1, 2019

दोस्ती



हर धर्म हर मजहब पर होती भारी है दोस्ती
हर मंदिर हर मस्ज़िद से होती है प्यारी दोस्ती
हर चीज़ आती है ऊपर से लिखकर हाथ मे
सब रिश्तो सब नातो से रहती अछूती है दोस्ती



गीता कुरान बाइबल सी पाक है दोस्ती
ऊंच नीच ओर भेदभाव नही मानती है दोस्ती
धर्म इक बार जुदा कर सकते इंसा को
इंसा इंसा भेदभाव मिटाती है दोस्ती



हर दुख हर सुख में रहती साथ है दोस्ती
आँखों के पानी को सोख सकती है दोस्ती
जब भर जाये राह कठिनाई ओर काटो से
रास्तो में दोस्ती के भूल बिछाती है दोस्ती



दूर देश मे अपना सा प्यार लाती है दोस्ती
जमी की दूरियों से कम नही होती है दोस्ती
अपनो की याद जब आती है परदेस में
माँ की ममता का सा अहसास भी लाती है दोस्ती



कभी प्यार का पहला अहसास दिलाती है दोस्ती
चुपके चुपके प्यार में बदल जाती है दोस्ती
दोस्त बनकर आते है पहले जिंदगी में
धीरे धीरे जिंदगी बन जाती है दोस्ती



जिंदगी में विस्वास का दीपक जलती है दोस्ती
अंधियारे जीवन मे उजाला लाती है दोस्ती
तोड़ दे विस्वास जब ये दुनिया तुम्हारा
बाप बनकर बेटे से संभालती है दोस्ती



विस्वास की बुनियाद पर बस टिकती है दोस्ती
दोस्ती पर अंधविस्वास करती है दोस्ती
मर मिटे जो दोस्त दोस्ती के खातिर
बड़ी मिन्नतों से किस्मत को मिलती है दोस्ती

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