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जलते भुजते लोग (Jalte-Bhujte Log)


डरी डरी सी राहो पर कदम लगे है अनजाने
किसे पकड़ अब साथ चले और किसे अब पहचाने
हर हल्की सी आहत पर डरते घबराते लोग
कोई अगन न कोई तपिस बस जलते भुजते लोग

अपनी अपनी माया सबकी , सबके अपने गम
लोग बहुत है दुनिया मे, इंसान हो गए कम
एक अजब से देश हुआ कि कड़वे है अब लोग
कोई अगन न कोई तपिस बस जलते भुजते लोग

नीमो के सब पेड़ थे अपने सबके गीतों को गाते थे
हर घर के दरवाजे खुलकर कर घर तक तो जाते थे
अपने घर में अजनवियो से आते जाते लोग
कोई अगन न कोई तपिस बस जलते भुजते लोग

जीवन है एक दृश्य सुनहरा कुछ वक सुनहरी यादों का
धूल से धुंदली कुछ भूली बिसरी बातो का
अपने गुजरे कल में मर मरकर क्यों जीते है लोग
कोई अगन न कोई तपिस बस जलते भुजते लोग

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