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इस दुनिया को किसने देखा, जाना किसने इस जग को (Is Duniya ko Kisne Dekha)


इस दुनिया को किसने देखा, जाना किसने इस जग को
इस दुनिया को मैं देखु, देखे ये दुनिया मुझको

अलग खड़ा से लगता जग में
असाधारण व्यक्तित्वों स्व भरे इस मग में
रचना में कही पक्षपात नही पर एक प्रश्न अब मेरे मन मे
क्रूर अनय क्यों मुझ पर थोपा और दिया क्यों वर तुझको?
इस दुनिया को मैं देखु, देखे ये दुनिया मुझको

पास सदा लोगो का घेरा नही पसंद मुझे आता
साथ सदा चलना लोगों का नही कदापि मुझे भाता
दुनिया मे बढ़ने आगे को खुद कदम बढ़ाना है मुझको
इस दुनिया को मैं देखु, देखे ये दुनिया मुझको

इस दुनिया को जितना जाना लड़ती उतनी कर्कश है
मानव कर्म हर पल जग को बना रहे विध्वंसक है
युद्ध तर्ज से ऊपर उठकर प्यार फैलाना है मुझको
इस दुनिया को मैं देखु, देखे ये दुनिया मुझको

जग में लेकर आया सपना प्यार लू और प्यार दूँ अपना
पर इस जग के रिवाज़ में कब सच होता है सपना
पर दुनियावाले हरदम अब क्यों दया दिखाते है मुझको
इस दुनिया को मैं देखु, देखे ये दुनिया मुझको

माता पिता ने जन्म दिया ये मेरी खुशकिस्मत ही
क्रूर अनय ईश्वर ने थोपा ये मेरी बदकिस्मत है
खुशकिस्मत बदकिस्मत के हाथों की न कठपुतली बनना मुझको
इस दुनिया को मैं देखु, देखे ये दुनिया मुझको

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