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आहतों को शर्मिंदा करने के लिए


आहतों को शर्मिंदा करने के लिए
अबके चले ही आओ मिलने के लिए

तुम फैलाओ पर आसमानो में
छोड़कर मुझे जलने के लिए

बड़ी ज़ालिम है तेरी दुनिया
मौका नही देती संभलने के लिए

होता है जब मिलो मुदत्तो बाद
कोई बात ही नही मिलती करने के लिए

इत्तफ़ाक़ ही था उसका मिलना उस दिन
वर्ना क्यों कहता वो साथ चलने के लिए

तुम ख़्वामखा आस लगाए बैठे हो
यह कोई दिल नही पिघलने के लिये

शतरंज हो या जिंदगी का चाल
एक हुनर चाहिए चलने के लिए

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