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जानवर जो ३०० डिग्री में भी जीवित रह सकता है - Tardigradum




दुनिया में ऐसे हज़ारों जीव है जिनके गुड ओर प्रक्रति इतने अजीब होते है की बिना वज्ञानिक तथ्य के विश्वास करना मुश्किल होता है । आज हम ऐसे ही एक जीव की चर्चा करेंगे जो आकर में तो इतना छोटा है की नग्न आँखों से दिखाई भी नहीं देता । पर ये जानवर ३०० डिग्री के तापमान , स्पेस vacuum ओर बहुत ही उच्च pressure पे ज़िंदा रह सकता है 

ऐसा ही एक जानवर है टार्डिग्रेड्स. बहुत ही अजीब सा दिखने वाला छोटा सा प्राणी पर बहुत ही दमदार 



जोहान अगस्त एफ़्रैम गोएज़ ने मूल रूप से जर्मन में टार्डीग्रेड क्लेनर वासेरबीर नाम दिया , जिसका अर्थ है "थोड़ा पानी भालू" (आज, उन्हें अक्सर जर्मन में बर्टियरचेन या "छोटे भालू जानवर" के रूप में संदर्भित किया जाता है)। Tardigradum नाम का अर्थ "धीमी गति से चलने वाला" है और इसे 1776 में लाज़ेरो स्पल्नज़ानी द्वारा दिया गया था




टार्डिग्रेड्स के बारे में क्या खास है?

टार्डिग्रेड आठ अंगों वाले सूक्ष्म जानवरों का एक वर्ग है और एक अजीब जानवर है जिसका एलियन जैसा व्यवहार है | पृथ्वी पर हर जगह उच्चतम पर्वत से लेकर सबसे निचले समुद्र तक, टार्डिग्रेड्स की कई प्रजातियां पायी जाती है | ये विशेषकर पानी में रहते हैं, लेकिन भूमि पर, आप उन्हें लगभग हर जगह और विशेस्कर काई में पाए जाते हैं।
शोधकर्ताओं की एक यूरोपीय टीम ने एक FOTON-M3 रॉकेट के बाहर दस दिनों के लिए पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए जीवित टार्डिग्रेड्स का एक समूह भेज था | और वैज्ञानिको ने पाया की टार्डिग्रेड्स पृथ्वी पर जीवित लौट आए | वैज्ञानिकों ने पाया कि टार्डिग्रेड  अंतरिक्ष में 68 प्रतिशत अनाज के माध्यम से रह रहे थे। मतलब ये की विषम परिस्थिति पे टार्डिग्रेड अपनी खुराक काम या जयादा कर सकता है|  है न बहुत अजीब | 

भूमि पर रहने वाले टार्डिग्रेड पृथ्वी के कुछ सबसे शुष्क स्थानों में पाए जा सकते हैं | जैसे की जहाँ पिछले 25 सालों से बारिश का कोई  रिकॉर्ड नहीं है



टार्डिग्रेड्स ऐसा कैसा कर पाता है ?

भूमि पर रहने वाले टार्डिग्रेड ने काम पानी या बिना पानी के रहने के लिए एक विचित्र समाधान विकसित किया है: जब उनका पर्यावरण सूख जाता है तब टार्डिग्रेड्स एक विशेष अवस्था में प्रवेश करते है जिसे डिसेकेशन कहा जाता है, जिसमें वे सिकुड़ते हैं - अपने शरीर के पानी के लगभग 3 प्रतिशत को खो देते हैं 
और अपने digestion को धीमा कर देते हैं, जो इसकी सामान्य गति का 0.01 प्रतिशत है। मतलब ये की जो खाना एक दिन में पचना था अब वह कम से कम १०० दिन में पचेगा | इस अवस्था में, टार्डिग्रेड तब तक बने रहते है, जब तक उन्हें फिर से पानी नहीं मिल जाता, तब तक वह कुछ भी नहीं करता है। जब ऐसा होता है, तो जीव फिर से स्वाभाविक जीवन में वापस आ जाता है जैसे कि कुछ भी नहीं हुआ था।
इससे भी अधिक आश्चर्यजनक बात यह है कि टार्डिग्रेड इस अजीब अवस्था में एक दशक से अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि टार्डिग्रेड्स की कुछ प्रजातियां एक सदी तक भी इस अवस्था में जीवित रह सकती हैं। जबकि टार्डिग्रेड का औसत जीवनकाल कुछ महीनों की ही होता है।"यह काफी अजीब लगता है, टार्डिग्रेड केवल कुछ हफ्तों या महीनों के लिए रहते हैं, कि जीवनकाल कई, कई वर्षों तक खिंच सकता है

नीचे दिते गए चित्रों में हम डेक सकते है कैसे अभी साधरण अवस्था से डिसेकेशन अवस्था में जाता है और वापस साधारण अवस्था में आ जाट है 



कुछ बहुत ही विशेष बातें 

  1. यह जीव 300 डिग्री फ़ारेनहाइट तक और निम्न -458 डिग्री फ़ारेनहाइट पेभी जीवित रह सकता है 
  2. डरती पर पाए जाने वाले सबसे भारी pressure (जो समुद्र तल में पाया जाता हैका  गुना झेल सकता है
  3. स्पेस में भी जीवित रह सकता है (धरती पर रहने वाले किसी अन्य जीव केलिये ये सम्भव नहीं है)
  4. Emergency के हालात पे अपने शरीर को सिकोड़कर छोटा कर लेता है जिससे ये बहुत कम भोजन पे दशकों तक जीवित रह पाता है 

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