तपस्या में लीन साधु 500 वर्षो से (Tapasya Mai Leen Sadhu)



कुछ रहस्मयी चीज़े ऐसी होती हैं जिन्हे समझना हम इंसानो के लिए अभी तक संभव नहीं हो पाया है | हमारा तंत्र ईटा जटिल है की ये काम कैसे करता है इसको सोच कर ही बहुत हैरानी होती है| किस तरह एक व्यक्ति अपने उलझनों से परेशान रहता है और कही एक व्यक्ति को कोई उलझन ही नहीं होती| कही किसी को खुशी की तलाश रहती है तो कही कोई खुशिया बाटता रहता है|अगर आपने कही किसी वेद या पुराण में ये पढ़ा है की किसी व्यक्ति की आयु हज़ारो वर्ष थी तो मै उसे मिथ्या नहीं मानूँगा| हमारे शरीर में वो शक्तिया है जिससे वो पड़ाव को भी पाया सजा सकता है| 

ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे मै हम चर्चा करेंगे जो विज्ञानं के अनुसार तो सैकड़ो साल पहले मर चुके है पर उनकी ममी आज भी विज्ञानं को मिथ्या साबित कर रही है


हिमाचल की खूबसूरत वादियों में ताबो मठ से करीब 40 किलोमीटर की  दुरी पर स्पीति गांव में ऐसा ममी है जो दुनिया भर के लोगों के लिए कौतूहल और रहस्य का विषय बना हुआ है | ऐसा दावा किया जा रहा है की ये ममी ५०० बर्ष पुराणी हो सकती है जो एक बौद्ध तपस्वी सांगला तेनजिंग की है | जो पिचले कई सदियों से तपस्या में लीन है |  

कैसे हुई ममी की खोज

पहले ये ममी नौगांव ही रखी गई थी और एक स्तूप में स्थापित थी।  एक भयंकर भूकंप जो 1974 में आया था, उस भूकंप के कारण यह ममी मलबे के अंदर दब गई थी। यह ममी दोबारा तब मिली जब 1995 में भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के जवान सड़क निर्माण के लिए काम कर रहे थे। ऐसा बोलै जाए है की उस समय ममी के सर में एक कुदाल लगे से चोट लग गयी थी उस समय ममी और ममी के सिर से खून आने लगा था ।

भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल ने ममी को 2009 तक अपने कैंपस में रखा। बाद में ग्रामीण इसे अपने साथ ले गए और अपनी धरोहर मानते हुए उन्होंने उसे अपने गांव में स्थापित किया। ममी को एक शीशे के केबिन में रखा गया है और उसकी देखभाल ग्रामीणों ने खुद संभाल रखी है। गांव वाले बारी-बारी इस ममी की देखभाल के लिए अपनी ड्यूटी लगाते हैं।


पीछे की कहानी 

ऐसा कहा जाता है की गांव में बिछुओ का बहुत आतंक था जिसकी बझा से गांव वालो का जीना बहुत मुस्कील हो रहा था | सांगला तेनजिंग उसी प्रकोप को समाप्त करने के लिए साधना पर बैठे थे | जब संत ने समादि लगायी तो बिना बारिस के इंद्रधनुष निकला और बिछुओ का प्रकोप समाप्त हो गया 


क्या ये संभव है

क्या ये संभव है कि कोई व्यक्ति 500 सालो से भी ज्यादा जीवित रह सके। विज्ञान की भाषा मे कहे तो संभव नही है पर अगर प्रकृति में हम देखे तो एक जीव ऐसा है जिसकी औसत आयु तो कुछ माह होती है पर जरूरत पड़ने पर ये एक अजीब अवस्था मे चला जाता है जिसमे ये जीव 100 साल से भी जी सकता है । 

जानवर जो ३०० डिग्री में भी जीवित रह सकता है - Tardigradum

इसका मतलब ये होता है कि प्रकर्ति में इसकी संभावना है । और इंसान ये संभावना योग ये द्वारा प्राप्त कर सकता है ।  तो इसकी पूरी संभावना है कि उन्होंने योग द्वारा उस अवस्था को प्राप्त किया था और हो सकता है अभी भी वे उसी अवस्था मे हो।

योग में ऐसी बहुत संभावनाएं है और मुक्ति के लिए इस अवस्था को प्राप्त करना वैसे भी अनिवार्य है।


नोट: ये मेरा निजी मत है कि ऐसा होने की संभावना है। 

कैसे पहुँच सकते है स्पिति गांव

412 किलोमीटर लंबी (256 मील) सड़क पर शिमला मार्ग से किन्नौर के रास्ते स्पीति घाटी पूरे साल उपलब्ध रहती है। विदेशी पर्यटकों को किन्नौर के माध्यम से स्पीति में प्रवेश करने के लिए इनर लाइन परमिट की आवश्यकता होती है। स्पीति की सीमा समदो (काजा से 74 किमी) पर शुरू होती है जो भारत-चीन सीमा के काफी निकट है। गर्मियों में इसे रोहतांग दर्रे और कुंजुम घाटी से होते हुए मनाली पहुंचा जा सकता है। मनाली स्पीति उपमंडल के काजा मुख्यालय से 201 किमी दूर है। हालांकि मनाली से स्पीति तक जाने वाली सड़क शिमला से स्पीति की तुलना में बहुत ही खराब और खराब स्थिति में है



जरूर पढ़े

महाभारत से भी पुराने पेड़ (80000 साल पुराने )

हिंदुस्तान का रॉबिनहुड - टांटिया भील


क्या भगवान वाकई मे चहु ओर है? एक प्रयोग


चौसठ योगिनी मंदिर (Chaushat Yogini Mandir)

Comments