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सबके साथ उठो बैठो यहाँ कौन पराया है (Sabke saath utho baitho)




सबके साथ उठो बैठो, यहाँ कौन पराया है
क्युकि हम सबको उस एक ही ने बनाया है

आओ तलाश करे फिर बेसबब उसकी
जो हर सांस तक में समाया है 

करो सियासत अपनी अपनी मौत पे उसकी
और करलो अपने नाम जो उसने कमाया है

उम्र की तपिश में सफेदी ओढे
पहचानता नहीं मैं, यहाँ कौन आया है

जितनी चादर उतने पैर पसारो
किसी ने क्या खूब बताया है

पीठ पीछे चुपके से कभी तुमने हमे
कभी हमने तुम्हे आजमाया है


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