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जख्म हर रात जगाने चले आते है (Jakhm har raat jagane chale aate hai)



जख्म  हर  रात  जगाने चले  आते  है 
अश्क़  भी  उनका  साथ  निभाने  चले  आते  है 

करबाटूं  में  बीत  रही  सब  रातें  मेरी 
दूर  तक  हालत  सही  नज़र  नहीं  आते  है 

फ़क़त  पाने  खोने  का  नाम  मोहब्बत  नहीं 
दर्द ,जुदाई  और  इंतज़ार  भी  इसी  में  आते  है 

दिल  में  बाकी  है  यही  आरज़ू  अब  तो 
उन्हें  भी  याद  आये  जिन्हे  याद  किये  जाते  है 

जिंदगी  बीत  रही  हर  एक  पल  में 
गुजरे पल वापस  नहीं  आते  है 

जमाना  छोड़  देता  उनको  बहुत   पीछे 
वक़्त  के  साथ  जो  चल  नहीं  पाते  है


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