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हसरत-ऐ-नादा संभल जा अब न कोई फरियाद कर (Hasrat-e-naada)



हसरत-ऐ-नादा संभल जा अब न कोई फरियाद कर
फक्त राहे इश्क मे और न मुझको बर्बाद कर



दिन न जाने कितने बीते चक जिगर के भूलने मे 
देखकर चेहरा किसीका फिर न इसको शादाब कर



रंग कितने रूप कितने मन है कितने इंसान के
फिक्रमंदी भूलकर ये सबको तू आदाब कर



कैफियत हर राह की सब मंजिलो की ढुडकर 
कोई तो राहेगुजर पर खुद  को तू आजाद कर



जो बसाले दिल मे उसको तू बसा ले जिन्दगी मे
जो निकाले  दिल से उसको और जयादा न याद कर



हर्फ़-हर्फ़ लिखकर कभी तनहइयो मे इसको सुनकर 
जिन्दगी की हर ग़ज़ल पर खुल के तू इरसाद कर

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