Breaking News

क्या आप जानते है? स्विट्ज़रलैंड में गाय के पेट में छेद क्यों किया जाता है? (Cow with hole in stomach)

https://drive.google.com/uc?export=view&id=1sC-SjmzPbCH1DWZKLIEYU6J4BMemBIAu
Cannulated Cow - पेट में छेद के साथ 


आज दुनिया एक ऐसे मुक़ाम पे पहुँच चुकी है यह उच्च प्रदर्शन की उम्मीद केवल इंसानों से नहीं जानवरों से भी की जाने लगी है। जानवरों से ज़ायद से लाभ कमाने के लिए उनके ऊपर हज़ारों प्रयोग किए जा रहे है जिससे जानवरों से कम से कम लागत में ज़्यादा से ज़्यादा लाभ कमाया जा सके।

ऐसे ही एक प्रयोग की चर्चा हम करेंगे जिसे गायों पे प्रयोग किया जा रहा है जिससे उनका पाचन तंत्र बेहतर किया जा सके और दूध के उत्पादन को बढ़ाया जा सके। इन गायों को The Cannulated cow कहा जाता है


क्या होती है Cannulated Cow?


Cannulated cow को समझने से पहले हमें cannula विधि को समझना होगा। वैसे तो यह एक बहुत की आम है और हम जब भी हॉस्पिटल जाते है वह हम cannula को आसानी से देख सकते है । समझने के लिए नीचे दिए गए चित्र को देखे।
https://drive.google.com/uc?export=view&id=1wgBJtf5LznKwush_BcGvpZVUkOFM8fau
Cannula विधि, जिसमे पतली सी नाली रोगी के शरीर में डाली जाती है

जैसे की हम दिए गए चित्र में देख सकते है कि एक नली गाय के पेट में डाल दिया जाता है और बाहर से इस प्रकार बंद किया जाता है की बाद में ज़रूरत पड़ने पर आसानी से खोला जा सके । इस प्रकार Cannulated cow वो गाय होती है जिसके पेट में सर्जरी के द्वारा एक छेद किया गया है जिसका उपयोग गाय के पाचन के देख रेक में किया जाता है


गाय के पेट में छेद किया क्यों जाता है?


घरेलू पशुओं को अच्छे पोषण तत्वों का पता लगाना उनके स्वास्थ्य को बढ़ाना हमेशा से ही एक उच्च प्राथमिकता है। इसके किए Ohio USA के एक  राज्य में कुछ शोध की मदद से इस संयोजन को खोजने की कोशिस की जा रही है, जो कि cannulated गायों की मदद से है।


इसके क्या फ़ायदे होते है?


Cannulated cow बाक़ी की गायों की तरह ही होती है बस उनके पेट में cannula फ़िट कर दिया जाता है जिससे वैज्ञानिक गाय के पेट की गतिविधियों पे नज़र रख सके
गायों के पेट में मुख्यतः चार कक्ष होते हैं जिनमें सबसे बड़ा रुमेन होता है। ओर यह गुहा कैनुलेटेड गायों के साथ अनुसंधान के लिए ऑपरेशन का फोकस है। रुमेन पेट का वह हिस्सा होता है, जहाँ पशु का अधिकांश पाचन होता है, जिसे शोधकर्ता अधिक जानने की कोशिश कर रहे हैं। गाय आमतौर पर प्रतिदिन 25 किलो भोजन का सेवन करती हैं और यह भोजन कभी-कभी जानवरों के लिए सर्वोत्तम पोषक तत्व प्रदान नहीं करता है। इस पर शोध करके, डेयरी उत्पादकों की गुदवत्ता ओर गायों के भोजन के स्थर को सुधारने का प्रयास जारी है

गाय के पेट के चार मुख्य कक्ष


बाहर के सूक्ष्म जीवो से रक्षा कैसे होती है?


रुमेन में पोषक तत्वों के लिए भोजन का पाचन लाखों सूक्ष्म जीवों द्वारा किया जाता है।  इस प्रकार ये पादत्ति रोगाणुओं को दूर करके गाय को स्वस्थ रखता है। आपको लगता होगा कि इस बड़े से छिद्र से बाहर के सूक्ष्म जीव गाय के पेट में प्रवेस कर सकते है ओर हाय के स्वास्थ्य को नुक़सान पहुँचा सकते है, लेकिन वहाँ पहले से ही रुमेन में प्राकृतिक रोगाणुओं की इतनी अधिक उपस्थिति होती है कि , नए रोगाणुओं को जीवित रहने के लिए पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते हैं। क्यूँकि गाए अब पहले के अपेक्षा ज़ायद तंदूरस्त होती है तो कई बार किसान उन्हें दूसरे जानवरों के साथ भी रखते है उनका स्वास्थ्य बेहतर करने के लिए


अन्य


बहुत सारे समाजसेवी गायो के प्रति इस असम्वेदनशीलता के लिए आवाज़ उठाते रहे है | उनके अनुसार इस विधि में गायो को असीम दर्द से गुज़ारना पड़ता है और यह पूर्णरूप से अप्राकृतिक है | किसानों और शोधकर्ताओं का दावा है कि यह प्रक्रिया गायों की ऊर्जा दक्षता में सुधार करके पर्यावरण की मदद कर सकती है, जो बदले में उनके द्वारा उत्पादित मीथेन की मात्रा को कम करती है।सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान गायों को एनेस्थेटाइज किया जाता है जिससे गायों को सर्ज़री के दर्द का अनुभव नहीं होता है।लेकिन पशु अधिकार प्रचारकों का दावा है कि यह पशुओं का दुरुपयोग है, और इस प्रथा को क्रूर करार दिया जाना चाहिए।
अभी हाल फ़िलहाल यह विधि मुख्यत अमेरिका ओर योरोप में ही प्रचलित है

अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी होतो अपने मित्रो और परिवार जन के साथ शेयर करे| अगर आपके कुछ सुझाव हो तो हमे कमेंट सेक्शन में बता सकते है | 


जरूर पढ़े

  1. तपस्या में लीन साध ५०० वर्षो से (Tapasya Mai Leen Sadhu)
  2. महाभारत से भी पुराने पेड़ (80000 साल पुराने )
  3. हिंदुस्तान का रॉबिनहुड - टांटिया भील
  4. जानवर जो ३०० डिग्री में भी जीवित रह सकता है - Tardigradum
  5. चौसठ योगिनी मंदिर (Chaushat Yogini Mandir)

No comments