क्या आप जानते है? संसद भवन का डिज़ाइन किस मंदिर से मिलता है? (Chaushat Yogini Mandir)


चौसठ योगिनी का मंदिर (जो बिल्कुल संसद भवन से मिलता जुलता है), जिसे एकट्टसो महादेव मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, भारतीय राज्य मध्य प्रदेश में मुरैना जिले में स्थित 11 वीं शताब्दी का मंदिर है। यह देश के कुछ ऐसे योगिनी मंदिरों में से एक है जो अच्छी स्थिति में है। मंदिर एक गोलाकार दीवार से बना है जिसमें 64 कमरे हैं और एक दम बीचो बीच में एक मंडप है, जो एक आंगन से अलग है जो आकार में गोलाकार है, जहाँ भगवान शिव को विराजित किया गया है। यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा एक प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया गया है।


मंडप जिसे आँगन द्वारा अलग किया गया था


खूबसूरत योगिनी मंदिर


सूर्यास्त में खूबसूरत योगिनी मंदिर


कौन होती है योगिनी


गहनों से सजी धजी महिलाएं हिंदू मंदिरों में खुद को कला में डुबोकर, नृत्य करती थी  मंदिरों में संगीत गाती थीं और देवताओ से प्यार करती थीं, मगर आध्यात्मिक | ऐसा मान सकते है की उनका ईश्वर को पाने का तरीका थोड़ा अलग रहा होगा  जिसमे जीवन की सुंदरता को इंकार न करते हुए भी ईश्वर को पाने का रास्ता खोजा गया होगा | 


क्या है योगिनी मंदिर 


हीरापुर चौसट योगिनी मंदिर में काफी चित्र देवियो को विभिन्न मुद्राओं में दिखाते हैं। कुछ नाचते हुए, कुछ लोग धनुष और त्रिशूल के साथ, कुछ संगीत बनाते हुए, कुछ शराब पीते हुए, कुछ घर के कामों में हाथ बँटाने के साथ। ज्यादातर महिलाओं को बढ़िया हेयरस्टाइल के साथ निखारा जाता है। दूसरों के पास सांप, या भालू, या शेर, या हाथी का सिर होता है। वे मानव सिर, पुरुष शरीर, कौवे, मुर्गा, मोर, बैल, भैंस, गधे, सूअर, बिच्छू, केकड़े, ऊंट पर खड़ी होते हैं। मुरैना मंदिर में ऐसा कुछ  भी  नहीं  पाया  गया  है | हो  सकता  है  वक़्त  के  साथ  उनको  मंदिर से  हटा  दिया  गया  हो |


इतिहास


एक शिलालेख के अनुसार मंदिर का निर्माण कच्छपघाट राजा देवपाल द्वारा 1323 ई में  किया गया था। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान करने का स्थान था। 


क्यों  मंदिर  का  नाम  चौषट  योगिनी  पड़ा 


चौंसठ ही क्यों? इसका कोई स्पस्ट जबाब नहीं है । हो सकता है कि यह चौंसठ कलाओं को संदर्भित करता है, या चौसट अप्सराओ को । हो सकता है कि अर्थ बहुत अधिक गूढ़ है, समय के आठ प्रभागों का उल्लेख करते हैं जो एक दिन या आठ दिशाओं या शतरंज बोर्ड के बक्से को बनाते हैं


अन्य चौषट योगिनी  मंदिर 


वैसे तो ज्याततार योगिनी मंदिर नस्ट हो चुके है पर कुछ अब भी बचे हैं। ओडिशा में दो हैं: बोलपुर के पास भुवनेश्वर और रानीपुर के पास हीरापुर। और मध्य प्रदेश में तीन जबलपुर के पास भेड़ाघाट में, मुरैना जिले के मितौली में, ग्वालियर के पास और खजुराहो में नॉट-सेक्रिकुलर खंडहर हैं।


चौषठ योगिनी मंदिर जबलपुर


चौषठ योगिनी मंदिर हीरापुर


चौषठ योगिनी मंदिर खजुराहो



क्या विशेष है ?


  • ऐसा माना जाता है की ब्रिटिश बास्तुकार जिसने भारतीय संसद भवन का निर्माण किया था उसने चौसट योगिनी मंदिर मुरैना से प्रेरणा ली थी | पर इसका कुछ साक्ष्य उपलब्ध नहीं है
  • मंदिर का संरचना कुछ इस प्रकार की गयी है जिससे ये भूकंप रोधी रह सके और भूकंप के झटके सहन कर सके क्युकी चौषट योगिनी मंदिर मुरैना भूकम्पीय क्षेत्र में है 
  • पानी का इकठा करने के लिए मुख्य मंदिर में से एक नाली भण्डारण क्षेत्र तक जाती है जिससे वह पानी एकत्र किया जा सके

कुछ ऐतिहासिक अभिलेखों में उल्लेख है कि मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में मितावली (मितौली) में एक मंदिर के डिजाइन पर आधारित है। इस मंदिर को चौसट योगिनी मंदिर के नाम से जाना जाता है, चौसर शब्द बड़े गोलाकार मंदिर के भीतर 64 मंदिरों का जिक्र करता है। मंदिर का निर्माण 8 वीं शताब्दी में किया गया था। यह सीस्मिक जोन III में स्थित है।

Very nice and detailed article wrote by Devdutt Patanaik on Yogini temple


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