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दोस्ती



हर धर्म हर मजहब पर होती भारी है दोस्ती
हर मंदिर हर मस्ज़िद से होती है प्यारी दोस्ती

हर चीज़ आती है ऊपर से लिखकर हाथ मे

सब रिश्तो सब नातो से रहती अछूती है दोस्ती



गीता कुरान बाइबल सी पाक है दोस्ती

ऊंच नीच ओर भेदभाव नही मानती है दोस्ती

धर्म इक बार जुदा कर सकते इंसा को

इंसा इंसा भेदभाव मिटाती है दोस्ती



हर दुख हर सुख में रहती साथ है दोस्ती

आँखों के पानी को सोख सकती है दोस्ती

जब भर जाये राह कठिनाई ओर काटो से

रास्तो में दोस्ती के भूल बिछाती है दोस्ती



दूर देश मे अपना सा प्यार लाती है दोस्ती

जमी की दूरियों से कम नही होती है दोस्ती

अपनो की याद जब आती है परदेस में

माँ की ममता का सा अहसास भी लाती है दोस्ती



कभी प्यार का पहला अहसास दिलाती है दोस्ती

चुपके चुपके प्यार में बदल जाती है दोस्ती

दोस्त बनकर आते है पहले जिंदगी में

धीरे धीरे जिंदगी बन जाती है दोस्ती



जिंदगी में विस्वास का दीपक जलती है दोस्ती

अंधियारे जीवन मे उजाला लाती है दोस्ती

तोड़ दे विस्वास जब ये दुनिया तुम्हारा

बाप बनकर बेटे से संभालती है दोस्ती



विस्वास की बुनियाद पर बस टिकती है दोस्ती

दोस्ती पर अंधविस्वास करती है दोस्ती

मर मिटे जो दोस्त दोस्ती के खातिर

बड़ी मिन्नतों से किस्मत को मिलती है दोस्ती

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