Breaking News

Astitva-Mera-Mujhi-Main




बहुत दिन से गुफ्तगू चालू थी की रूबरू हो गया
आकर मेरे सामने तनकर खड़ा हो गया
मै बड़ी सोच मे था की कहा से इतनी हिम्मत इसने जुटाई है
क्या इसके पुरे ही नाश होने की नौबत आयी है


आज उसकी हुंकार मे गर्जना थी
और गर्जना मे न कोई संका थी
गरजा वो मुझ पर उसके सवालों के साथ 
कहने लगा उसके अस्तित्व की बात


मेरे अस्तित्व को तूने ही दबाया है
तेरे होने से ही मेरा अब कोई नहीं साया है
मै पहचानहीन हो गया हु 
तेरे बाहर की दुनिया मे कही खो गया हु
तेरा झूठ मुझे मार रहा है 
और जगत मुझे ही दोषी जान रहा है


मैंने बोला
तेरे अधूरे सत्य ने ही मुझे बनाया है
और तेरे पुरे असतय ने मुझे प्रेरणा दी है
मेरे जुठ से तुझे लानत आती है 
पर जब तेरे अंदर के कीचड को अपने झूट से छुपाया था
तेरे अधूरे सच को जब दुनिया से बचाया था 
तब तूने ही मुझे धन्यबाद किया था 
मेरे होने पर सायद गर्व भी किया था


मै तो हु ही असत्य ये मुझे पता है 
पर तू सत्य है या असतय क्या तुझे ये पता है
तेरा अस्तित्व बहुत कठिन है 
हजारो पुस्तके, कहानिया और सबक लगते है तुझे बनने मे 
और मुझे तो बस एक झूट ही काफी है


तेरे सत्य मे कोई जान नहीं है
तू सत्य है या असत्य इसका तुझे खुद ज्ञान नहीं है
तू खुद मुझे कितनी बार सत्य मान चूका है 
मेरे होने से ही तेरा अधूरा सत्य जिन्दा है
क्युकी जग के लिए में ही तू है
और मेरे असत्य ही तेरा सत्य है
इसलिए तेरा अस्तित्व वैसा ही है
जैसा तूने मेरा अस्तित्व बनाया है


मैंने तेरा अस्तित्व नहीं छुपाया
तूने मुझे असतय के लिए ही है बनाया
अबकी तेरी कृति तुझ पे ही भरी होती है 
तो तुझे तेरे अस्तित्व की हानि होती है


एक ही छवि है तू और मैं
पर शायद तू दो समझने की भूल कर बैठा
मैं वही हु जो सच मे तू है

Share your thoughts in comment section
Share with your family and friends

No comments