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मैं अंधेरे कमरे का कोना (andhere kamre ka kona)


सम्पूर्ण जग था मेरा विस्तार
क्षीडता जा रहा मेरा संसार
एक रोज़ ही था ये तो होना
अंधेरे कमरे का कोना

अस्तित्व रहा तब भी बाकी
थे जो मेरे वो अब भी साथी
उम्मीद नही सीखा खोना
अंधेरे कमरे का कोना

हम में जागी तन नई आश
मानव हृदय को बनाया निवास
खाव्व नही छोड़ा संजोना
अंधेरे कमरे का कोना

दिन दिन बढ़ता मानव का आकार
उतना ही दिलो में अंधकार
आगम से मेरे था ये ही होना
अंधेरे कमरे का कोना

फिर भी सुना सुना अपना समाज
नही अपने कोई आसपास
नही जानता क्या चाहूं, खुश होना या दुख होना
अंधेरे कमरे का कोना

चहु ओर है जब में चमत्कार
अपने जग में बस अंधकार
बस इस बात का ही तो है रोना
अंधेरे कमरे का कोना

मत रखो दिल मे अंधकार
खुश रहो और फैलाओ प्यार
बस यही बात चाहू कहना

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