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जब तुम्हारे साथ मैंने ये सफ़र प्रारम्भ किया (Jab Tumhare saath maine ye safer prarambh kiye)



हाथ तुम्हारा थामकर जैसे नई सुरुआत हुई
हर फीजा की खुसबू से जैसे नई मुलाकात हुई
थमी थमी सी धडकनों ने फिर धड़कना प्रारंभ किया
जब तुम्हारे साथ मैंने ये सफ़र आरम्भ किया

खोई हुई सब मंजिलो को दिसा नई इक मिल गयी
जो कभी बस खाव्व था हर खुशी वो खिल गयी
जिन्दगी के हर पल को मेरे तुमने रंगों से रंग दिया
जब तुम्हारे साथ मैंने ये सफ़र आरम्भ किया

मुस्किलो की राह मे काया जब थककर चूर हुई
चंचल चितवन एक हसी से हर मुस्किल पर मे दूर हुई
सम विसम हर राह मे तुमने डटकर मेरा संग दिया
जब तुम्हारे साथ मैंने ये सफ़र आरम्भ किया

लव्ज नहीं मिल पाते है चाहू देना जो कोई संवाद
मेरी प्रिये होने को मेरी देता हु तुमको धन्यबाद
हर जनम तुम साथ हु ये भी तुमने वचन दिया

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