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9 नयी आदतें जो हम भारतीयों ने अपनायी है इंटरनेट आने के बाद ( Habits Indian Got after Internet)



जब भी कोई नयी चीज़ हमारे सामने आती है तो हम अपनी उत्सुकता रोक नहीं पाते| ऐसा ही कुछ हुआ जब हम भारतीयों ने इंटरनेट का उपयोग चालू किया| वैसे तो Internet आने के बाद से बहुत कुछ बदला है| तरक्की से काफी रास्ते इंटरनेट ने मुहैया कराये है| इंटरनेट एंड सोशल मीडिया एक ऐसी दुनिया है जहाँ आराम से खोया जा सकता है| और जहा आसानी से सफलता भी पाई जा सकती है। 
आज हिंदुस्तान में ये आलम है की 50% से जयादा आबादी बिना इंटरनेट के नहीं रह सकती . खास तौर से फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्स ऐप के बिना तो आप अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। ताज्जुब कि बात 





इस दौरान हमे कब ये 9 नयी गन्दी आतें लग गयी पता ही नहीं चला 

9 ऐसी गंदी आदतें जो हम भारतीयों को लगी है इंटरनेट और सोशल मीडिया आने के बाद 

सडक पर चलते समय मोबइल पर बात करना 

ये वो गंदी आदत है जिस्के चलते हम खुद को तो मुश्किल मे डालते है बल्कि दुसरो के लिए भी मुश्किल खडी कर देते है।  इस आदत से बचने क एक हि उपाय है कि सडक पे चलते वक्त अपने उपर ओर आस पास पुरा ध्यान रखना चाहिए 





बेसब्री का व्यवहार करना 


इन्टरनेट कि बजह से कफी चीज़े आसानी से मिलने लगी है। इस बेसब्री का सबसे जयादा असर BPO industry पे देखा गया है। हम लोग किस बेतरतिव तरीके से BPO के कर्मचारियो से बात करते है इससे हम सभी भलि भाँती परिचित है। पर बसब्र व्यवहार का परिणाम और भी बुरा है। जैसे कि अगर हमारे फोन मे एक दिन भी सिगनल नही आता है तो हम कम्पनी को connection बन्द करने कि धमकी देने लगते है। परिडाम स्वरुप कम्पनी ओर mobile tower लगाती है जिससे अन्ततः mobile signal से होने वाला प्रदूसन बढ जाता है। हमारी गंदी आदत क परिडाम प्रकृति को भी भुगतना पड़ता है   


इंटरनेट पे समय बर्बाद करना 


हम भारतीयों की ये सबसे गन्दी आदत है  की अमूल्य समय इंटरनेट पे खर्चा करो और फिर काम करने के लिए शाम को लेट तक ऑफिस या काम पे रखो | सही मायनो पे अगर देखा जाए तो ९०% दिनों में काम काम ही होता है पर हम जयादातर समय इंटरनेट पे स्टेटस उपदटेस में खर्चा कर देते है | इस आदत को सुधारने का सबसे आसान तरीका है की फ़ोन का इंटरनेट बंद रखा जाए और लंच में या चाय पे चालू करके सारे स्टेटस चेक किये जाए | 
मुझे जर्मनी और फ्रांस में काम करने का अनुभव है और वह मैंने यही पाया है की लोग समय पर ऑफिस आते जाते है और फ़ोन अपना हाथो में नहीं बॉक्स में रखते है और मन लगाके पहले काम निपटाते है




दुसरो की देखादेखी अकाउंट बनाना


दुसरो को देखादेखी अकाउंट बनाना हे सोशल मीडिया में चाहे उसकी जरूरत हो या न हो | फेसबुक पर्याप्त नहीं तो इंस्टाग्राम चाहिए और वो भी पर्याप्त नहीं तो स्नैपचैट भी चाहिए और जाने क्या क्या | क्युकी उसका अकाउंट है तो मेरा भी होना चाहिए और फिर अपना पूरा समय अकाउंट की डेक रेक में झोक देना | अगर देखा जाए तो हम सही मायने में एक ही सोशल मीडिया अकाउंट अच्छे से इस्तेमाल करते है बाकी तो बस बैटरी और मेमोरी कहते रहते है



आँख बंद करके फोटो अपलोड करना


कुछ लोग तो सोशल प्लेटफार्म पे आँख बंद करके फोटो अपलोड करते है| कितने किये है ये तो उन्हें पता ही नहीं रहता है | ऐसा लगता है फ़ोन का पूरा फोटो गैलरी अपलोड कर दिया हो | अगर स्टेटस शेयर करना है तो कुछ चुने हुए फोंट्स से भी शेयर किया जा सकता है | ये आदत गन्दी और भी इसलिए हो जाती है क्युकी हम समझना ही नहीं चाहते की लोग कितने फोटेस देखेंगे | लोग मुश्किल से २-४ ही फोटो देकते है

Spam Messages बिना खुद चेक किये धड़ल्ले से आगे शेयर करना


भारत में इतने जयादा सोशल मीडिया users है की कोई भी जानकारी आग की तरह फैलती है | जैसा मैंने पहले कहा की इंटरनेट का सदुपयोग किया जाए तो जिंदगी बचा सकता है , जैसा की हमने देखा की कई खोये बच्चे सही सलामत अपने घर पहुंच जाते है क्युकी फोटो आग की तरह शेयर हो जाए है पर इसका बुरा पहलु ये है की बुरी जानकारी इससे भी जल्दी फैलती है और हम भारतीय कभी भी अपने दिमा का सदुपयोग नहीं करते की किस जानकारी को आगे बढाने से समाज का फायदा होगा | 

Unnecessary Browsing 


पहले समय में खाली समय पे कुछ अच्छा काम किया करते थे लोग, कम से कम आपस पे बैठकर बातें तो कर ही लिया करते थे | पर इंटरनेट और फ़ोन आने के बाद खाली समय में बस फ़ोन पे ही अंगुलिया चलती रहती है| कुछ नहीं तो फेसबुक खोल लेंगे वो हो गया तो इंस्टाग्राम वो हो गया तो यूट्यूब और एक बार यूट्यूब पर पहुंच गए तो बस भूल जाओ फिर समय के बारे में | हम भारतीयों को सायद बहुत कम जानकारी है की पस्चिमी देशों में लोग ऐसे ही खाली समय का उपयोग करके हज़ारो रूपए कमा रहे है क्युकी पे इंटरनेट का इस्तेमाल सही रूप से कर रहे है | आज भी कुछ लोग अच्छे उपयोग करते है इंटरनेट का पर उनकी संख्या बहुत कम है न के बराबर | सस्ता और फ्री इंटरनेट  ही इस बुरी आदत की जड़ है | पर तकनीक समय के साथ सस्ती होती ही है पर हमे हमेसा हमारे दिमाग का उपयोग तो करना चाहिए की हमारे लिए क्या सही ये और क्या गलत 

Digital Detox in Indian Way

पोर्न मूवीज


मैंने काफी सोचा इस बारे की इस पॉइंट को कवर करू या नहीं | पर इस पॉइंट को कवर करना बहुत जरुरी है क्युकी हमारी वर्तमान पीड़ी इससे काफी जयादा ग्रसित है | में मानता हु की इसको आदत के तौर पर नहीं ले सकते पर हमे ये भी मानना हॉग की भारत में ये समस्या बहुत विकत है वर्तमान में क्युकी इंटरनेट के सास्तिकरण के कारण इसकी पहुंच काफी बढ़ी है और खासतौर से किशोर युवक युवतिया आसानी से इसकी गिरफ्त में आ जाते है

छोटे बच्चो के हाथ मे mobile थमाना

 

एक एक दो दो साल के बच्चो को Youtube का video चाहिए खाना खाने के लिए । छोटे बच्चो मे mobile का  उपयोग चिन्ताजनक है । इस गंदी आदत क कारण परिवारो का छोटा हो जाना है । पहले तो परिवार मे १०-२० लोग हुआ करते थे तो बच्चे किसी न किसी के साथ् व्यस्त हो जाते थे। 

मेरे अनुसार कुछ हमारी समझ के कारण ओर कुछ इन्टरनेट के बेहद सस्त होने के कारण ये आदतें बढ़ती जा रही है। तकनिक के विस्तार को तो हम रोक नही सकते पर खुद पर काबु कर इन्टरनेट के प्रभाव से बचा जा सकता है 

ये मेरे निजी विचार है| मेरा किसी को ठेस पहुंचने का इरादा नहीं है



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