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क्या भगवान वाकई मे चहु ओर है? एक प्रयोग








क्या भगवान चारो ओर है।
वैसे तो उनके अनेको नाम है पर भगवान ईस्वर प्रभु प्रमुख रूप से चलन मे आते है। भागवत गीता मे कृष्ण ने स्वयं को भगवान कहा है और स्वयं को सर्वव्यापी कहा है। कृष्ण ने स्वयं को ब्रममंड के कन कन स्थापित कहा है।

पर क्या वाकई मे भगवान चहु ओर व्याप्त है या फिर हम मनुस्य भर्मित है या सत्य से की भगवान चहु ओर व्याप्त है। भगवान का ना तो कोई रूप है ना आकार। जो भी रूप और आकार है वह हमारे द्वारा ही बनाया हुआ है। हम भगवान को वैसा ही पाते है जैसे हम खुद है।

अगर कोई गोरा व्यक्ति भगवान की तस्वीर बनाएगा तो वह भगवान को गोरा दिखायेगा। अगर कोई काला व्यक्ति भगवान की तस्वीर बनाएगा तो वह भगवान को काला दिखायेगा। और अगर घोड़े गधे भी भगवान की तस्वीर बना पाते तो भी घोड़े और गधे ही बनायेगे।

संसार मे सभी जगह भगवान के अस्तित्व की जाहिर करने के लिए मंदिर मस्ज़िद गिरिजाघर आदि बना दिये गए है। पर ये सभी आखों कानो ओर हमारे शारीरिक अंगों को प्रभावित कर सकते है  पर आत्मा को नही। आत्मा को प्रभावित करने के लिए क्या?

आत्मा ही वह तत्व है जिससे भगवान की खोज की जा सकती है और इस खोज मे आत्मा को किसी भौतिक तत्व की आवस्यकता नही होती। इसी खोज मे औऱ भगवान के अस्तित्व को समझने के लिए मैंने एक बहुत ही साधारण सा प्रयोग किया।

मैं अपनी दैनिक चर्या के अंतर्गत भगवान की पूजा अर्चना करता रहा था पर भगवान की मूर्ति के सामने भगवान के दर्शन करते हुए। कुछ दिन पस्चात मैंने भगवान के पूजन मैं थोड़ा सा परिवर्तन किया। इस बार मैंने पूजा भगवान को पीठ दिखाकर की। और मैंने पाया कि मेरा मन भगवान के ध्यान मे लग ही नही पा रहा था। बार बार ध्यान मूर्ति की तरफ ही जा रहा था। कुछ दिन बाद मुझे ये आभास हो गया कि मुझे मूर्ति की तरफ ही पूजा करनी होगी। पर फिर भी मैंने प्रयोग को निरंतर करने का निर्णय लिया।

कुछ दिन बाद मुझे आभास होना आरम्भ हुआ कि अब मूर्ति की तरफ ध्यान कम होने लगा और भगवान के ध्यान मे ज्यादा लगने लगा था। और धीरे धीरे कुछ महीनों मे पूरी तरह से ध्यान भगवान पे केंदित होने लगा। इस तरह मुझे इस बात का पूरी तरह से स्पस्टीकरण मिल गया कि भगवान चहु ओर है।
ये बस हमारे अभ्यास पर निर्भर करता है कि हम किस प्रकार का अभयास करते है। इसलिए तपस्वी जंगलो ओर पहाड़ो मे कही भी बैठ कर भगवान का ध्यान किया करते थे औऱ भगवान के पूर्ण स्वरूप को प्राप्त कर लिया करते थे।

भगवान चहु ओर है। आपका क्या अनुभव है।

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